इंदौर, (सोशल रिपोर्टर) : आज फिर से मौक़ा मिला प्यारे प्यारे बुज़ुर्गो से मिलने का… चाहती हूँ 15-20 दिन में इन सभी से मिलना, लेकिन घर की जिम्मदारियों और भी कई करणो से जाना सम्भव नहीं हो पाता है…लेकिन जब भी मैं इस वृद्धाश्रम में जाती हु तो लगता है सभी हमारे घर के ही बूढ़े-बुज़ुर्ग है जो इस वृद्धाश्रम नामक आशियाने में रहते है.

सभी का लाड़-दुलार देखकर बहुत अच्छा लगता है लेकिन मन दु:खी भी होता है कि इतने अच्छे बिलकुल बच्चों की तरह निश्छल जैसे लोगों के लिए कैसे उनके बच्चों के घर में जगह नहीं होती है.meet_oldwomen

कई बुज़ुर्ग बड़े गर्व के साथ बताते है की हमारा बेटा यही है इसी शहर में बहुत अच्छी नौकरी करता है और बहुत अच्छा भी है बस परिस्थितियाँ हमें यहाँ ले आयी..किसी की बेटी है यही,लेकिन बेटी है, ससुराल है वो हमें कैसे रख सकती है.. oldwomen-help-meetसभी का कुछ ना कुछ कारण है लेकिन आप जब इनसे मिलने के लिए कभी जाओगे तो अपनापन एसा मिलेगा जो हमें कई बार अपनो से भी नहीं मिलता है ..oldwomen

इसलिए plz जब भी वक़्त मिले इनसे मिलने इनके साथ थोड़ा सा वक़्त गुज़ारने ज़रूर जाए ..मेरी दोस्त पूजा शाह अपने गुरुजी और फ़ैमिली के साथ मुझे भी इन्वाइट किया था.. indoreआज पूजा के husband का bday है. गुरुजी ने साईं भजन में सभी को सम्मिलित किया तत्पश्चात बुजूर्गो से दीप प्रज्ज्वलित करवाया… केक कटिंग के बाद स्नैक्स ,केक दिए और सभी को उपहार भी दिये …poojashah

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