vini agrawal

इंदौर, (सोशल रिपोर्टर) : बहुत साधारण सा नाम था दुनिया में, स्कूल में, पढ़ाकू सी लड़की गुम-सुम चुप रहने वाली विनी अग्रवाल बचपन में ही फिर कॉलेज में जाने के बाद पहली बार कॉलेज का इलेक्शन लड़ा जीत कर खुशी हुई। पढ़ाई के साथ-साथ जॉब भी की। 16 वर्षों से पढ़ाई, जॉब करने के बाद (बीकॉम, एमकॉम, एमबीए पीजीडीसीए) फिर शादी हुई। सपने लेकर नए घर गई, किंतु किस्मत से शादी खराब हुई। एक बार फिर उसी जगह आ खड़ी हुई, जहां से सफर शुरू किया था।award_vini_agrawal

अकेले कोर्ट केस लड़ा, बिना पैसे लिए डिवोर्स दिया, अपना स्वाभिमान जिंदा रखा एक बार फिर जॉब करना शुरू किया पर इस बार दिल में कुछ अलग करने की चाहत थी। चाहत थी अपनी पहचान बनाने की, चाहत थी कुछ ऐसा कर दिखाने की, जिसे टूटी शादी के कारण जो लोग ने उपहास किया उसे तालियों में बदलने की। शुरुआत हुई सेमिनार से स्कूल-कॉलेज में फ्री इंग्लिश ‘Personality डेवलपमेंट’ से सफर शुरू किया, रास्ता मिलता गया। फिर जॉब के साथ सामाजिक सेवाओं का सिलसिला शुरू हुआ।vini agrawal

मानव अधिकार के मेंबर बना लोगों की समस्याएं सुनी, उनकी मदद की, पद मिला जिला अध्यक्ष का। इसके बाद भी मुश्किलें कहां खत्म होनी थी, एक बार फिर शुरू हुई लोगों की बातें समाज सेवा कार्य लड़कियों का नहीं, कौन शादी करेगा। इन सब बातों में घर के लोग, रिश्तेदार, दोस्त सब शामिल थे। जिन्होंने मेरे दुख के समय साथ ना दिया पर मुकाम हासिल करने में टांग जरूर खींची थी। नाम बनाने का जितना विरोध होता सामाजिक कार्य गति तेज होती। समय बदला, सामाजिक प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण स्थान मिलने लगा, जॉब के साथ सामूहिक कार्य सामाजिक कार्य चरम पर था। 2017 में यह पदोन्नति हुई….viniagarwal_award

1. मानव अधिकार एसोसिएशन में संभाग अध्यक्ष
2. भारत विकास परिषद महिला प्रमुख
3. श्रम जीवी पत्रकार संघ में जिला सचिव
4. वैश्य भारती पालिका में वरिष्ठ पत्रकार पद मिला।Vinni Agarwal

सिलसिला यहीं नहीं थमा जब पहली बार ‘उज्जैन रत्न’ अवार्ड के लिए नॉमिनेट हुई, उज्जैन की प्रथम महिला तभी लोग, रिश्तेदार, दोस्त चुप न हुए बातें होती रही लड़कियों का काम वही सामाजिक सेवा। उसके बाद 2017 से लगातार 2019 तक ‘वुमन आइकन’ टाइटल मिला आज पहचाना जाता है विनी अग्रवाल का नाम वरिष्ठ समाजसेवी के रूप में, लेकिन इस बार लोगों की बातें बदल गई लड़की ने अपने सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक मंच पर अपनी जगह बना ली। जो लोग विरोध करते थे आज वही लोग मंच पर सम्मान करते हैं।

अब एक साधारण सी लड़की विनी से सुश्री विनी अग्रवाल हो गई, जिन्होंने अपने मिलनसारिता, हंसमुख कार्यकुशलता के दम पर अपनी पहचान बना ली, ‘अब यहां साधारण सी लड़की खड़ी हो गई’। इस पूरे मुश्किल सफर में केवल दो ही व्यक्ति हैं दुनिया में जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया वह है, मेरी मां और मेरे दुख सुख में मेरे बॉस कामरान खान। इनके लिए यही कहना चाहूंगी। बॉस-बॉस इन द वर्ल्ड इन दो शख्स ने मुझ पर सबसे ज्यादा भरोसा कर साधारण स्थान से मंच तक पहुंचा दिया।

“विनी मोहताज नहीं किसी मंच सम्मान की वह तो खुद ही बागबान है पूरी कायनात की”

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